पृथ्वी की पीर!!by Dr.Purnima Rai

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पृथ्वी दिवस ( हाइकु)

    (1)

पृथ्वी की पीर

देख,भरते नैन

दूर है मैया!!

    (2)

स्वप्न झिंझोड़े

सुबक रही धरा

आऊँगा मैं माँ!!

     (3)

जैविक खाद

स्वार्थ रहित स्नेह

उर्वरा भूमि!!

   (4)

जलपूरित 

आँगन वसुँधरा

बूँद-बूँद से!!

डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।

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