धरती कहे पुकार के!!

0
77

🌎…..धरती कहे पुकार के
(धरती-दिवस पर विशेष)

सुनो ! माँ चीख उठी है
क्योंकि..औलाद ने नोच नोच के खा लिया है…
भूमि पे..भौमसुरों ने
पापी साम्राज्य बसा लिया है
इन भौमसुरों ने…भूमि का श्रृंगार बिगाड़ा है…
कुदरती बाग-बगीचों संग
जंगलों को उखाड़ा है…
खेत खत्म कर रहे हैं…इमारतें बना रहे है…
ये रक्त-पिपासु भौमासुर जीवों को खा रहे हैं…
जंगल नष्ट हो रहे हैं..जंगली जीवन खत्म होने की कगार पे है…
इन दैत्यों की नज़र..पूरे संसार पे है…
लोहे की दुनियां हो गई.. और जीवन खो रहा है…
नभ पंछियों से सूना.. बदरंग हो रहा है…
पहाड़ों को काट रहे है…नदियों को पी रहे हैं…
भौमसुरों के टोले…धरती पे जी रहे हैं…
माँ रो रही है..इसकी औलादें मर गई हैं….
कुछ नष्ट हो गई हैं..और कुछ बिखर गई हैं..
हे भूमि..जरा याद कर
तेरे भौमासुर ने जब..उत्पात मचाया था..
पीड़ा से भर उठी थी तू
माधव को बुलाया था…
तब भौमासुर मिटा था…और बोझ इक घटा था…
तूने ना जाने कितनी बार तब
कृष्ण-कृष्ण रटा था..
भौमसुरों से देखो…भूमि भरी पड़ी है…
भानु की बेटी देखो..बेहोश सी पड़ी हैं…
अब एक नही…अनेकों..केशवों को आना होगा…
मां देखो मर रही है…इसको बचाना होगा..
फाइकस या मोरपंख की औपचारिकताएं छोड़ो…
धरती पे पीपलों का..जहां बसाना होगा…
वन फिर बसाने होंगे…पौधे लगाने होंगे…
विलुप्त- जीव..फिर से वापस लाने होंगे..
तब फिर से सूनी सुबहें.. संगीत भरी होंगी..
और पंछियों की चोंचें..फिर गीत भरी होंगी…
धरती-दिवस पे…फोटो वाला
समारोह नही अब चाहिए…
अखबारों में तस्वीरों वाला..मोह नही अब चाहिए..
गर सच में तू धरती का..है सच्चा लाल कोई..
मां का श्रृंगार हो उठे.. ऐसा कर कमाल कोई..
राज✍

Loading...
SHARE
Previous articleदादी का प्रेम !!
Next articleहरे पेड़ ना काटे होते!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here