दंगा-फसाद !!

2
110

दंगे का प्लान

सोनू ,मुकेश ,मनोज सब रात में एक चौराहे पर मोटरसाइकिल खडी़ कर इकट्ठे हुए।
सलीम ,आबिद ,सलमान के मोटरसाइकिल आते ही मनोज सलीम से बोला- “देखो पिछला वाला दंगा अच्छे से नही हुआ था, नेता जी नाराज है। नेता जी बोल रहे थे कि हम सब के पीछे इतना खर्च किये और फ़ायदा कुछ नही मिला।”
सलीम रोबदार आवाज में बोला- “बोल भाई, प्लान क्या है इस बार का?”
मनोज बोला- “तुम अपने एक छोकरे को बोल देना कि मजहबी कपड़े और टोपी पहन कर पान वाली दुकान के सामने इधर-उधर चहलकदमी करेंगा और मेरे दो छोकरे भगवा गमछा ओढ़े तुम्हारे मजहबी छोकरे से मार-पीट करेंगे। उसके बाद हमलोग कमान सम्भाल लेंगे।
सलीम बोला- “ठीक है भाई, मेरे कुछ और भी छोकरे लोग लाठी डंडे के साथ चाय वाले की दुकान पर रहेंगे, और तुम अपने छोकरे लोग को बोल दो कि पकौड़ा वाले के दुकान पर रहेंगे।”
फिर दोनो गैंग अपनी-अपनी मोटरसाइकिल चालू कर के जाना चाहें तब तक सलीम बोला- “भाई, मीडिया वालों को बोल देना कि समय से पहुँच जाएँगे।
मनोज बोला- “तू उसका टेंशन मत ले, मीडिया वाले किताब वाली दुकान पर अखबार पढ़ रहें होंगे पूरा लाइव टीवी पर दिखाया जाएंगा। नेताजी भी देख लेगे कि हमारे छोकरे लोग कितने काम की चीज़ है।”



जियाउल हक
जैतपुर सारण बिहार

Loading...
SHARE
Previous articleहरिया( लघुकथा)
Next articleजी चाहता है!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here