धड़कनों को याद हैं बातें ज़बानी  आपकी!!

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ग़ज़ल

धड़कनों को याद हैं बातें ज़बानी  आपकी।
इसलिए मुमकिन नहीं यादें भुलानी आपकी।।

आईना बनने का इतना शौक़ भी मत पालिये।
जान ले लेगी किसी दिन हक़बयानी आपकी।।

चूमकर होंठों से अपने दे गये थे जो हमें।
जान से प्यारी है हमको वो निशानी आपकी।।

आपसे बिछड़े हुए यूँ तो ज़माना हो गया।
साथ हैं अब भी मगर यादें पुरानी आपकी।।

आप ही का नाम लेकर चल रही हैं धड़कनें।
हो गयी है जब से दिल पर हुक्मरानी आपकी।।

आपके ही दम से ज़िंदा ,है अभी तक “यासमीं।
खून की हर बूँद में है बस रवानी आपकी।।


डॉ. यासमीन ख़ान 03-04-2018

 

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