नील गगन में उड़ती चिरैया by Dr.Purnima Rai

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नील गगन में उड़ती चिरैया

नील गगन में  उड़ती चिरैया,देख के मनवा हर्षाया।
 रंग -बिरंगे पंख सलौने,आंगन नभ का महकाया।।
बोल सुरीले पैनी नजरें ,सब को राह दिखाती थी;
सन्मार्ग पर चले ये दुनिया,हमको हुनर सिखाती थी;
सांझ सवेरे गोरैया ने, अपना आंचल लहराया।। 
नील गगन में उड़ती………………………..
धीरज से आगे बढ़ती वो ,मंजिल को पा जाती थी; 
सायना कल्पना टैरेसा, औ दुर्गा बन कर भाती थी; 
दीप जलाकर राष्ट्र-प्रेम का, परचम उसने फहराया।।
नील गगन में उड़ती………………………..
आलस्य को त्याग दो सारे ,श्रम का पाठ पढ़ाती थी;
अवगुणों में गुण हीं चुनें सब, गीत चिरैया गाती थी;
सात रंग से भूमि सजा के,व्योम “पूर्णिमा” चमकाया।।
नील गगन में उड़ती……………………….. 

DR.Purnima Rai ,Asr

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