होली के रंग अपनो के संग!

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1*होली है जी होली है ।(एस के जूही, विशाखापट्नम)

होली है जी होली है।
रंगो में रंगने के लिए,
तैयार मित्र की टोली है।
होली है जी होली है।…

खेतों मे सरसों के सुंदर,
पीले-पीले फूल खिले हैं।
कहीं बज रहे ढोल मंजीरे,
कहीं पे बिछड़े मीत मिले हैं।

फसलों की बरसात हुई है,
मौसम भी खुशहाल बना है।
रात और दिन हुए बराबर,
सर्दी-गर्मी की नही है झंझट।

सूर्य-किरण में सात रंग है,
इंद्रधनुष भी सात रंग का।
जीवन रंगों का संगम है,
मित्रों होली का मौसम है।

रंगों में सब घुले हुए हैं,
सबके मन के द्वार खुले हैं।
“जूही” बिना भेदभाव के,
मन से मन के तार मिले हैं।

होली है जी होली है

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2*बहकी चाल (डॉ. यासमीन ख़ान)

मदमस्त है हाल
रँगी गुलाल।

गज़ब ताल
गुंजिया और माल
रंगीन थाल।

राधा सम्भाल
उड़े रंग ,गुलाल
रँगे गोपाल।

सब निहाल
मस्तानी हुई चाल
भांग कमाल।

नहीं मलाल
टमाटर से गाल
चमके भाल।

बहकी चाल
हुए सब कंगाल
फूल कमाल।

कैसा है साल
सब हुए बेहाल
मीठा कमाल।

तेरे नाल
बीते रे हर साल
जीवन माल।

तू मालामाल
बिन तेरे कंगाल
मोरे गोपाल।

डरी सखियां
नाचती क्यों अखियाँ
रँगीन बतियाँ।

ओ-रँगरेज
रंगीं मै तोरे रँग
तू ही है सँग।
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3*इंद्रधनुषी छटा (डॉ अरुण कुमार श्रीवास्तव अर्णव)

रंग इतने बिखेरे यहाँ जिंदगी ,
इंद्रधनुषी छटा हो सदा साथ में ।

बन के प्रह्लाद हम भी जियें तो जरा ,
होलिका भी मिले पर नहीं पाथ में ।।

द्वेष सारा भुला अब गले तो मिलो ,
गुलालों से चेहरे चमक जाएं अब ।

आज देने बधाई बढ़े फिर कदम ,
हो भले दुश्मनी हाथ हो हाथ में ।।

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4*होली की हार्दिक शुभकामनाएँ *आशीष पाण्डेय ज़िद्दी

 मिटाकर बुराई भलाई करो तुम,बहाओ जगत में सदा प्रेम गंगा।

निकालो सदा शूल पथ में बिछे जो,लगाओ गले छोड़ दो आज दंगा।।
न हो पाप जग में बढ़े पुण्य आगे,बता अंत अपना जले होलिका है।
मनाओ खुशी मिल सभी फाग खेलो,वसन साथ तन-मन रहे आज रंगा।

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5*होली किसके संग मनाऊं(राज कुमार
शिक्षक,सरकारी सीनियर सकेंडरी स्कूल,बल कलां, अमृतसर (पंजाब)

वो गुलाल मैं कहाँ से लाऊं
गुरबत भरे गाल जो रंग दे
भावहीन बरसानों को जो
प्रेम सहित जीने का ढंग दे
जिनके झोंपड़े पंक पुते हैं
टप -टप टपके जिनकी खोली
उनका तो हर लम्हा बेरंग
वो क्या जाने..क्या है होली
होली तो हर रोज है उनकी
भारत लूट जिन्होंने खा लिया
हर लम्हा रंगीन है उनका
विक्रम,नीरव और विजय माल्या..
लुटा देश, बदरंग हो रहा
किसको जाकर रंग लगाऊं
छम छम रोते गोप-गोपियां
होली किसके संग मनाऊं..
जी चाहे बरसाने की
मिट्टी को पूरे देश फैलाऊं
भावहीन ,प्रेमपथ भूले
दिलों में राधा नाम बसाऊं..
खत्म करूँ सब नाग कालिये
यमुना में अमृत भर जाऊं..
वृन्दावन सा राष्ट्र बनाकर
होली भरे रंग बिखराउं…
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6*सिया संग राम की होली(सुधीर सिंह सुधाकर,दिल्ली)

सिया संग चल पड़ी टोली,
मन में तरंग,भरो जिया में उल्लास।
धर लियो हो साजन, अबकी न चली कोई खास।।
करत जात बस संखियाँ, ठिठोली,रास परिहास,
मिल रहे दो नयन,होंठ थे उदास।
कुछ न कहत लखत,हाथ जोरी छोरियां आस व पास,
आत जात सब देख लेत,मन में भर लेत हुलास,
प्यार देखो पग रही,जगत में भई खुशी की बरसात।
सीता ने अबीर जो लगाई,राम जी चहक उठे,
वन में देखो सभी,नर-वानर रहे हुलस ।
आयो फाग उड़े है गुलाल,राम संग सिया होली खेल रही,
दुनिया में देख लो,आज सब कर रहे 

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7*होली की हार्दिक शुभकामनाएँ (शशि देवली ,गोपेश्वर)

प्रेम के रंग से भर पिचकारी
आज एक दूजे को रंग जाना।
कभी रुमाल दे देना हाथों में
कभी गालों में गुलाल लगाना।।

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8*    रंगोत्सव (रेखराज स्वामी)

नवरस उगले लेखनी , मीत सुनो हरहाल
छंद ताल लय सुर सहित , करते रहो धमाल

रंग प्रीत मन से मलो , दिल से गाल गुलाल
जन मानस छाये रहो , माँ शारद के लाल

मन गुलाब की महक हों , दिल केसर का बाग
होली खेलें यूं सखे , उमंंगे हियअनुराग।

संपादित  डॉ पूर्णिमा राय,अमृतसर 

 

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