औरत !!

0
129

औरत
——————————–

ज़िंदगी की आग में ,
लुहार के लोहे की तरह ..
देर तक तपाई जाती है !
ठोकी -बजाई जाती है ,और कभी पिघलाई जाती है !
कितने ही साँचों में ढाली या ढलवाई जाती है ।
फ़िर भी कीमती सोने की तरह ..जगमगा उठती है औरत !
रद्दी के कागज की तरह ..टुकड़ा -टुकड़ा फाडी जाती है ..
पैर की जूती बना दी जाती है ..
गेंद सी उछाली जाती है ,
शाख से तोड़ी जाती है !
गुलदान में सजा दी जाती है ..
कभी कली की तरह मसल दी जाती है
फ़िर भी ..
खुशबू बनकर हवाओं में –
बिखर जाती है औरत !
व्यंजन सी परोसी जाती है ..
पंखे सी झली जाती है ..
बाज़ारों में सजवाई जाती है ..
खरीदी और बिकवाई जाती है
फ़िर भी ..
संसार के आँचल में टाँके हुए चाँद -सितारों सी ..
झिलमिला उठती है औरत !
बाप की अदालत में ..
भाई की वकालत में ..
पीड़ाओँ के क्रंदन में
मर्यादाओं के उल्लंघन में ..
कभी कोडों से पिटवाई जाती है
या
ज़हर देके मरवाई जाती है ..
फ़िर भी ..बावरी मीरा सी
अमरता पा जाती है औरत !
अँधेरों से लड़ती है ..
टूटती ..संवरती है ..
चीरकर चट्टानों को ..
झरनों सी गिरती है ..
पत्थर सी सख्त भी है ..
फूल सी मुलायम है ..
आँधियों के बीच घिरी ..
औरत अभी कायम है !
औरत अभी कायम है !

Dr.shashi joshi

डॉ .शशि जोशी “शशी “

Loading...
SHARE
Previous articleदे दो आज गुलाब भेंट में
Next articleवूमन आवाज!!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here