समय नहीं फिसलता ..!

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समय नहीँ फिसलता ..!
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समय नहीँ फिसलता ..!
हम ही फिसल जाते हैं ..रेत की मानिंद ,
समय की मुट्ठियों से !!
और –
खो जाते हैं धूल बनकर हवाओं में !
क्या ही अच्छा हो ,
बजाय रेत ..या धूल बनने के ..
बन जाएँ हम ,
महकते हुए फूल ..!!
तब !
नहीँ फिसलेँगे इस सहजता से ,
समय की मुट्ठियों से !
और!!! यदि कभी ..
मौका पाकर कोई आँधी उड़ा भी ले जाए हमें !!
या ..
काल का पहिया मसल दे हमें ,
अपने पैरों तले ..तो भी –
जिंदा रहेंगे हम ..
इन हवाओं में !
खुशबू बनकर ..
दूर …दूर तक …देर तक ..
अपने वजूद के साथ !
इधर ..उधर ..
यहाँ ..वहाँ ..
अपने इर्द -गिर्द ..इन फिजाओं में !!!

Dr.shashi joshi

डॉ .शशि जोशी
जी .जी .एच .एस .बाँगीधार .सल्ट
अल्मोडा

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