तोटक छंदby Dr Purnima Rai

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तोटक छंद

 

तोटक छंद में कुल चरण होते हैं।इस छंद के विधान अनुसार 112×4 चार सगण अनिवार्य है ।दूसरे शब्दों में लघु लघु गुरु   अनिवार्य है।दो दो चरणों में तुकांत अनिवार्य है।

 

      (1)

उजियार करे नित सूरज ये;

अँधकार मिटे जग सूरज से।

मुख घूँघट ओढ़ लिया रजनी;

नभ चाँद सुहावन हे सजनी।

 

        (2)

तपती वसुधा जल को तरसे;

बन बादल मेह धरा बरसे।।

वन की लतिका फल-फूल लदी;

तितली करती सब दूर बदी।।

 

       (3)

चल भाग मुसाफिर वक्त चला ,

जग से किसको कब प्रेम मिला ।।

श्रम के मद में जन चूर हुये,

दुख रोग मुसीबत दूर हुये।।

 

      (4)

सुख आमद आँगन में बिखरे,

सजनी रजनी बनके सँवरे।।

हर चाहत में खुशियाँ सजती,

जग मानवता जब भी फलती। 

– डॉ०पूर्णिमा राय,अमृतसर

drpurnima01.dpr@gmail.com

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