ललित छंद (सार छंद)

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ललित छंद (सार छंद)

ललित छंद (सार छंद)यह सम मात्रिक छंद है जिसमें कुल 28 मात्रा होती हैं । 16,12 पर यति है और अंत में वाचिक भार 22 यानि (गागा ) है। इसमें कुल चार चरण हैं ।दो-दो चरण में तुकांत अनिवार्य है

(1)
मैया का प्यारा आँचल ये,
छाँव घनी देता है।
खुशी बाँट के जग में सारी,
सब गम हर लेता है।।
मुश्किल की घड़ियों में सबको ,
माँ दिखे सुहानी हैं।।
सुख-वैभव को कुर्बान करें ,
माँ यही कहानी है।।

(2)
पावन बेला वैशाखी में
फसलें पक जाती हैं।
दृश्य मनोरम देख-देख के
चिड़ियाँ मुस्काती हैं।।

जन आनंदित दिखें सभी अब,
चाह हृदय उठती है।
कृषकों की हालत सुधरे बस,
यही दुआ करती है।।

  • डॉ०पूर्णिमा राय,अमृतसर
  • drpurnima01.dpr@gmai.com
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