कैसे सम्मान होगा!!

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कैसे सम्मान होगा!!

अब तो समर में ही प्राणदान होगा,
अब तो क्रान्ति का ही आह्वान होगा,
या तो इस पार ही हमारा श्मशान होगा,
या हिन्दी का अखण्ड स्वाभिमान होगा|
भारतभूमि पर ही है हिन्दी को खतरा,
इससे ज्यादा और क्या तूफान होगा,
अब भी न जागा हिन्द का निवासी,
तो अब कैसे हिन्दुस्तान महान होगा ।
गुप्त, चतुर्वेदी महादेवी और निराला,
सब तो समर में ही लड़ गए
बचा न सके हम यदि अस्मिता माँ की,
तो शेष अब क्या व्यवधान होगा ।
राजनीति की कलुषित चालों ने,
भाषा के अस्तित्व को कुचल डाला,
संदल के जंगल में सर्पों का मेला,
इससे बड़ा तीर और क्या संधान होगा ।
राष्ट्रभाषा के सूर्य की तपन है जरुरी,
आन्तरिक विखण्डन की शीत छा रही,
सत्तामद में सारथी ही तो डूब रहे है,
भारत भूमि का शेष क्या अपमान होगा ।
समाज से संस्कार सिंचन गौण है,
परिवार से वृद्धों की मजबूरी मौन है,
माँ-बाप अंग्रेजियत की ओर भाग रहे,
विखण्डन का शेष क्या परिणाम होगा ।
संग्राम की आवश्यकता है अधिक,
समर के व्याकरण की जरुरत है,
सेवा के रणबांकुरों का ही महत्व है,
वर्ना माँ का शेष क्या अरमान होगा ।
राष्ट्र के सच्चे सचेतक मौन बैठे हैं,
माँ भारती की अश्रुधार के आगे,
हिन्दी के लिए तुम न जागे ‘अर्पण’ तो, 
तो भूमंडल में शेष क्या सम्मान होगा ।
*डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’*
हिन्दी ग्राम, इंदौर
सम्पर्क- 9893877455
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1 COMMENT

  1. हिन्दी के सम्मान पर सुदंर अभिव्यक्ति

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