आज नव निर्माण के हम गीत गाएँ।

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आज नव निर्माण के हम गीत गाएँ।

विश्व के पथ में हम फूल ही फूल भर दें,
विघ्न के हर शैल को हम धूल कर दें,
निर्बलों में बल भरें,मिलकर चले सब,

स्वर्ग का संसार हम भू पर बसाएँ।
आज नव निर्माण के हम गीत गाएँ

हर रुके राही को हम गतिमान करदें,
हर बुझे दीपक में हम नव प्राण भर दें,
विषमता , समता बने मेरी धरा पर,

शांति-शुचिता- प्रेम के नव स्वर जगाएं।
आज नव निर्माण के हम गीत गाएँ।

अब तिमिर जग में अधिक क्या रह सकेगा,
चेतना का रवि नई रचना रचेगा,
नव सृजन होगा, नई हर बात होगी,
सृष्टी को नव रुप दे फिर से सजाएँ।
आज नव निर्माण के हम गीत गाएँ।


अशोक गोयल पिलखुवा
08218065876

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