पंचचामर छन्द

0
1034

पंचचामर छन्द–

यह छंद चार चरण का वर्णिक छंद है जिसके
प्रत्येक चरण में लघु गुरु के क्रम से सोलह वर्ण / अक्षर
12 12 12 12 12 12 12
(ल ला – ल ला – ल ला – ल ला – ल ला – ल ला
12 12
– ल ला – ल ला )होते हैं

(1)
बढें सदा रुके नहीं मुसीबतें अपार हों
घटा घिरे निराश सी दिखे हिया करार हों ।
भुला वैर भावना सजा गुलाब आंगना
मिटा अहं विरोध को बना सुह्रद भावना ।।

(2)
मिले खुशी गमी यहाँ विकास बार-बार हों
अधीर हो न बाँधना विचारपूर्ण सार हों।।
सजे धरा खिले व्योम हवा बहे निखार हों
उड़े अबीर “पूर्णिमा “मिटे सभी विकार हों ।

  • डॉ०पूर्णिमा राय
Loading...
SHARE
Previous articleमहाशृंगार छंद
Next articleललित छंद (सार छंद)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here