महाशृंगार छंद

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महाशृंगार छंद
 
महाशृंगार छंद  चार पंक्तियों का छोटा मात्रिक छंद है ।जिसमें हर पंक्ति में कुल 16 मात्रायें होती है।
इसमें पहली और तीसरी एवं दूसरी तथा चौथी पंक्ति में तुकांत अनिवार्य है।हर पंक्ति का अंत गुरु लघु से अनिवार्य है।
 
        (1)
तुम्हीं हो जग के पालनहार 
विश्व का भला करो करतार।
मिटा कर वैर और तकरार
बसाओ एक नया संसार।।
 
          (2)
तभी हो दुनिया का उद्धार
 गिरा दें वर्ग-वर्ण दीवार। 
भरा हो भीतर सबके प्यार 
सजे फिर जन्नत सा संसार।।  
 
          (3)
मिले संबुद्धि संग संस्कार
बने पावन निर्मल व्यवहार। 
सूरत सीरत हो एक सार 
खिले जीवन में पुष्प बहार।।
 
          (4)
अमोल ज्ञान का गुरु भंडार 
जले दीपक मिटेअंधकार।
महकती फिजा ये सद्विचार।।
करें दिलों में ज्ञान उजियार।। 
– डॉ०पूर्णिमा राय
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