ट्राइसिटी में भव्य लाज़वाब सम्मान समारोह संपन्न !!

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पहली बार हुआ ट्राइसिटी में ऐसा भव्य लाज़वाब सम्मान समारोह

डॉ० प्रतिभा माही जो कि गुरुग्राम की निवासी हैं , अपने पतिदेव डॉ० मनोज गुप्ता जी , पशु चिकित्सक जो कि एक दुर्घटना में ख़ुदा को प्यारे हो गए , उन्हीं की जगह पशुपालन एवं डेरी विभाग हरियाणा में सेवारत हैं। एक प्रख्यात शायरा,कवयित्री व गीतकार के रूप में जानी जाने वाली डॉ० प्रतिभा माही 1986 से हर विधा में अपने शब्द व भावनाओं के मोतियों को पिरोती आ रही हैं किन्तु 2004 से साहित्य के क्षेत्र में अनेकों मंचों पर अपनी प्रतिभा के विभिन्न रंग बिखेरती आ रही हैं , पूरी लगन , शिद्दत और विश्वास का दामन थाम कर साहित्यसर्जक व साहित्य प्रेमी के रूप में अपना परचम भारत के अनेकों राज्यों के अनेकों शहरों में लहराती रही हैं । अपने पतिदेव की स्मृति में लगातार 12 सालों से राष्ट्रीय स्तर का सम्मान समारोह व कवि सम्मेलन के आयोजन कराती आ रहीं हैं। गुरुग्राम में
अपनी छाप छोड़ने के बाद अब एक साल से पंचकूला, चंडीगढ़ और मोहाली में भी अपनी ग़ज़लों की खुशबू बिखेर कर एक अलग पहचान बना ली है और अब तक यहाँ ट्राइसिटी में 5-6 साहित्यिक आयोजन व सम्मान समारोह करा चुकी हैं ये उनका शौक भी है और जुनून भी।
जो उनके इस भव्य समारोह की सफलता में साफ झलकता है।
“राष्ट्रीय कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह 2017′ ( 13वाँ वार्षिक राष्ट्रीय समारोह ) डॉ० प्रतिभा माही ने अपनी संस्था “भारतीय साहित्य संगम पंचकूला” द्वारा दिनांक 03/12/2017 दिन रविवार को ( ऑडिटोरियम हॉल ) गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट , सेक्टर 10, चंडीगढ़ में दोपहर 2.00 से मुख्य अतिथि डॉ० नसीब सिंह मन्हास , निर्देशक, चंडीगढ़ दूरदर्शन तथा विशिष्ट अतिथि श्री श्रीराम अर्श (मोहाली) श्री बी०डी०कालिया ‘हमदम’ (पंचकूला) श्री प्रेम विज ( चंडीगढ़ ) श्री ज़नाब शम्स तबरेज़ी ( पंचकूला ) के सानिध्य में आयोजित किया गया। जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर एकत्र हुये प्रख्यात व प्रबुद्ध कवियों और शायरों ने अपना विशेष योगदान देकर समारोह में चार चाँद लगा दिए। उक्त पाँचौ ट्राइसिटी के प्रबुद्ध व प्रख्यात शायर अतिथियों को एक नई प्रथा का आगाज़ करते हुए ‘पंच परमेश्वर’ के रूप में अंगवस्त्र, पगड़ी, शाल ,प्रशस्ति पत्र,मूमेंटो व भगवत गीता से डॉ० प्रतिभा माही व उनकी संस्था द्वारा नवाज़ा गया। इसके अतिरिक्त वहाँ उपस्थित प्रबुद्ध कवि व शायरों को निम्न अवार्ड और सम्मानों से सम्मानित किया गया।
‘ताज-ए-हिन्दुस्तां अवार्ड 2017’ से ग़ज़ल के बादशाह, उस्तादों के उस्ताद श्री मंगल नसीम (दिल्ली) को सम्मानित किया गया।
“राष्ट्रीय यशस्वी सम्मान 2017” से श्री अशोक भंडारी “नादिर” (पंचकूला) व श्री बलबीर तन्हा (चंडीगढ़) को नवाज़ा गया।
“राष्ट्रीय सितारा सम्मान 2017” से सुशील नरेलवी जी (चड़ीगढ़) , श्री पदम ‘प्रतीक’ (दिल्ली) तथा श्री पी०के० ‘आज़ाद’ (दिल्ली) को भी सम्मानित किया गया।
“अक्स-ए-माही स्मृति सम्मान 2017″ श्री एस०एल०धवन ‘कमल’ ( पंचकूला ) और सुश्री गुरदीप गुल (चंडीगढ़) को भी नवाज़ा ।
एक ओर पदम् प्रतीक ने अपने विचार कैसे प्रस्तुत किये देखिये—-
‎”सभी लोग उनको भला मानते हैं।
‎वो कितने भले हैं ये हम जानते हैं ।।”
दूसरी तरफ गायिका कंचन भल्ला ने डॉ प्रतिभा माही की ग़ज़ल को अपनी आवाज़ देकर सुरों से सजा दिया। वो ग़ज़ल इस प्रकार से है—–
‘ज़िन्दगी जो रूठ कर जाती नहीं।
ठोकरें मैं इस कदर खाती नहीं ।।’
फिर डॉ० प्रतिभा माही ने अपने माही को समर्पित एक ग़ज़ल प्रस्तुत की—-
“नज़र में वो काली घटा बन समाया।
‎वो जब याद आया बहुत याद आया।।”
श्री प्रेम विज जी ने अपनी बात कुछ यूँ कही —
“नहीं कोई भरोसा अब जहाँ के पहरेदारों का।
ख़बर क्या ख़ुद ही तोड़े क़हर आओ लौट चलते हैं”।।”

अब श्री कमल धवन जी का शेर भी देखें कि वो अपनी बात कैसे बयाँ करते हैं–।
” फूल हो तो फूल सा किरदार होना चाहिये ।
आप से माहौल खुशबूदार होना चाहिये ।।”
तो दूसरी तरफ़ श्री अशोक नादिर जी का अंदाज़े बयाँ देखिये—–
“आज रात जज़्बा -ए- मोहब्बत का असर देखेंगे।
हुस्न ही हुस्न को ता हद – ए- नज़र देखेंगे।।”

और हमारे बादशाह-ए-ग़ज़ल उस्तदों के उस्ताद मंगल नसीम ने अपनी शायरी की ऐसी छाप छोड़ी कि सभी श्रोतागण अपने स्थान से खड़े हो काफ़ी देर तक तालियाँ बजाते रहे । देखिये उनके शेरों की बानगी—
“साथ भी उनके रहना मुश्किल।
‎हिज़्र भी उनका सहना मुश्किल।।
‎सब कुछ उनसे ही कहना है ।
‎जिनसे कुछ भी कहना मुश्किल।।”
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“वो ज़ख़्म उसने हाल में जलते हुए दिए।
रखने पड़े मिसाल में जलते हुए दिए।।
पूजा के थाल जैसा वो चेहरा लगा मुझे।
दो नैन जैसे थाल में जलते हुए दिए।।”

श्री शम्स तबरेज़ी ने भी बहुत अच्छे शेर कहे—
“मैं सोचता हूँ कभी ऐसा हो न जाये कहीं।
कि ख्वाब आँख में हो आँख सो न जाये कहीं।।”
उक्त सभी कलमकार व शायरों ने अपनी रचनाओं से सभी का मन मोह लिया। सभागार में उपस्थित सभी श्रोतागण आनन्द से झूमने लगे तथा उनकी तालियों की गड़गड़ाहट पवन के साथ हिलोरें लेती हर तरफ गूँजने लगी। डॉ०नसीब सिंह मन्हास ने सम्पूर्ण आयोजन का मूल्यांकन कर समीक्षा की और कहा इससे पूर्व ट्राइसिटी में इतना भव्य सम्मान समारोह आज तक नहीं हुआ । उन्होंने डॉ प्रतिभा माही की मेहनत की तहे दिल से सराहना की।
‎कुछ अन्य कवियों और शायरों जैसे अमरजीत कौर ‘हृदय’, सुदेश ‘नूर’ , सविता गर्ग , कंचन भल्ला, मुसब्बिर , राजवीर सिंह ‘राज’ व इन्दर वर्षा ने भी अपनी रचनाओं से सभी को भाव विभोर कर दिया। समारोह सम्पूर्ण दृष्टि से सफल रहा। इसका पूरा श्रेय डॉ० प्रतिभा माही और उनकी बेटी दीक्षा गुप्ता व सभी साहित्य प्रेमी और साथियों को जाता है, जिनकी मेहनत व सहयोग रंग लायी।

दीक्षा गुप्ता
महा सचिव
भारतीय साहित्य संगम पंचकूला

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