सती-प्रथा( 3दिसम्बर विशेष)

0
40

     सती-प्रथा( 3दिसम्बर विशेष)

धर्म की आड़ में पुरुष-प्रधान समाज और कुछेक चालाक लोगों ने कुछेक स्वार्थों के लिए बहुत सी रीतियों में से एक रीति ऐसी चलाई जिसे महसूस करके रूह कांप जाती है…सन 1987 में मैं प्लस वन का विध्य्यार्थी था और राजस्थान के सीकर जिले के झुंझनू ग्राम में रूपकंवर नामक एक स्त्री के सती होने का निर्मम मामला सामने आया…उन दिनों इसे पूरा पढ़ा और पता चला कि जब रूपकंवर को उसके पति की चिता की तरफ दुल्हन बना कर उस पर बिठाया गया था तो उसकी चेतना जाग गयी थी और उसने इसका विरोध किया था..और वह पकड़ छुड़ाकर भागी थी..लेकिन ढोल-नगाड़ों की आवाजों और जयजयकार के नारों में उसकी आवाज़ दब गई थी और उसे भरे समाज में सती करके मन्दिर बनवा दिया गया..11 लोगों पे बाद में मुक़्क़दमा भी चला..देश आजाद होने के बाद सती के 40 मामले सामने आए ,जिनमे से 28 राजस्थान से सम्बंधित हैं..आखरी मामला 2008 में छत्तीसगढ़ से सम्बन्द्ध रखता है…..दरअसल सती है क्या ?सती शब्द संस्कृत के शब्द “सत”का स्त्रीलिंग है और ऐसा माना जाता है कि पति की मृत्यु पे जो स्त्री अपनी मर्जी से उसके शव के साथ जल जाती है उसे सती कहते हैं ।आइये अब देखें कि धर्म सती के साथ कहाँ जुड़ा है..इस प्रथा को इसका यह नाम देवी सती के नाम से मिला है जिन्हें दक्षायनी के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दु धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा अपने पति महादेव शिव के तिरस्कार से व्यथित हो यज्ञ की अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया था।…दूसरी घटना द्वापर युग में पांडु की पत्नी माद्री का अपने पति की चिता संग प्राण देने की है..तीसरा प्रमाण है हिन्दू ग्रन्थों में 3 सतियों का ज़िक्र है..सती अनसुइया,अहिल्या और सती सीता का नाम आता है ..लेकिन कहीं भी ऐसा वर्णन नही है कि इन्हें मजबूर किया गया हो..दक्ष पुत्री देवी सती अकेले हवनाग्नि में भस्म हुई जबकि उनके पति शिव बाद में उनके इस आत्मदाह से क्रोधित होकर राजा दक्ष या अपने ससुर का वध कर देते हैं…आइये अब देखें कि इतिहास में प्रामाणिक रूप से सती कहाँ आती है..भारतीय इतिहास में प्राचीन काल के दौरान सती प्रथा का जन्म गुप्तकाल में 510 ई. में अभिलेखीय रूप में देखा गया है। इस अभिलेख में महाराजा भानुगुप्त का वर्णन किया गया है जिनके साथ युद्ध में गोपराज भी मौजूद थे। युद्ध के दौरान गोपराज वीर गति को प्राप्त हुए जिसके बाद उनकी पत्नी ने सती होकर अपने प्राण त्याग दिए थे।…..बाद में मुसलमानों के हमलों से सिंध और पुराने विस्तृत पंजाब में यह प्रथा स्त्री को दुश्मन के हाथों से बचाने के लिए लघु रूप में सती और विस्तृत रूप में जौहर के रूप में देखी गयी…लेकिन सती स्त्री के खिलाफ एक घिनोना रूप ही नही बल्कि षड्यंत्र का भी एक हिस्सा रहा है…किसी अकेली स्त्री या पुत्रविहीन स्त्री की जायदाद पे कब्जा करने के लिए बाहरी लोगों या रिश्तेदारों ने धर्म की आड़ में यह घिनौना खेल खेला…”सती शब्द हम धार्मिक या नैतिक तौर पर उस स्त्री के लिए प्रयोग करते हैं जो कि पत्नीधर्म के उच्च आयामों को छूती हो और पूर्ण पतिव्रता हो”…सच मानिए तो सतीप्रथा चाहे किताबों या इतिहास में हमारे समाज और संस्कृति का गौरव है ,लेकिन इतिहास के इन पन्नों में सिसकियां है,अथाह दर्द है,मौत के भयानक दर्शन है जिसे स्त्री समाज ने बड़ी गिनती में सहा है और ये पन्ने सिर्फ और सिर्फ चीखो-पुकार सर भरे पड़े है…मेरा आज यह लेख लिखने का अभिप्राय एक नमन है राजा राम मोहन राय जैसे महापुरुष को जिन्होंने कि अंग्रेजी साम्राज्य की सहायता से और लार्ड विलियम बैंटिक के माध्यम से आज ही के दिन 3 दिसंबर 1829 को इस घिनौनी और गंदी प्रथा को कानूनी तौर पे बंद करवा दिया था ।….आशा है कि आप इस छोटे से प्रयास को सकारात्मक रूप से स्वीकार करेंगे और सामाजिक चेतना में इस छोटे से ज्ञान लेख का लाभ उठाएंगे ।

राजकुमार राज,शिक्षक,अमृतसर (पंजाब )

Loading...
SHARE
Previous articleकश्मीर में “हस्ताक्षर बदलो अभियान “की शुरुआत: हिन्दी प्रेमी हुए एकजुट
Next articleबचपन ना गुजरा होता!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here