पाली!!

0
63

*पाली*
मीरा की धरती है, क्या खूब है पाली,
नाम है छोटा पर  प्रतिभायें निराली।

यूं तो म्हारो राजस्थान घणों रंग रंगीलो है,
इसको हर शहर ढाणी स्वाद, मीठी बोली व प्रेम से भरयो है,

इण रो एक जिलो पाली गुलाब हलवे सी प्रसिद्धी पा रयो है, पाली भिन्न प्रतिभाओं की फसल खूब उगा रयो है,

*रामेश्वरजी गोयल *घीसूलालजी पारख *राकेशजी मेहता* ने *स्वच्छता* व *समाजसेवा* में भागीदारी निभाई।

*चिराग सिंह धीरज मालवीय* ने भी खूब प्रतिभा दिखाई,
कठिन परिश्रम व सच्ची लगन से *सोलर कार* बनाई।

*जितेंद्र जी के *कठपुतलि नृत्य* ने
हर तरफ धूम मचायी।
*बूगी वूगी IGT ENTERTENMENT KE LIYE KUCH BHI KAREGA* जैसे रियलिटी शो में नाम रोशन कर *इंडोनेशिया बैंकॉक* *कज़ाकिस्तान सिंगापुर* में भी अपनी शाख जमाई।

*विकल्प जी ने अक्षय* के रूप में *इंडियाज़ गोट टेलेंट द* *कपिल शर्मा शो कॉमेडी किंग SET MAX LIFE OK SONY TV* चैनल के शो में पाली की पहचान बनाई।

*इवेंट मैंनेजमेंट कुणाल तापड़िया*जी ने *iifa zeeCine awards Umang awards*
*चेतन मेवाड़ा* ने *प्रो कबड्डी जस्टिन बीबर स्टार डग्स फिल्म फेयर* मैनेजमेंट करके अपनी पहचान बनाई।

*ओम आचार्य जी प्रमोद भंसाली जी प्रमोद परिहार जी* ने मंच संचालन कर प्रोग्रामों की शान बढ़ाई।

*चिडिय़ाबाबू* ने खेल क्षेत्र में *बास्केटबाल* उछलाई।
*नज़र* साहब की नज़रों ने
*गुल्लू,नीरज, मानवेंद्र, हर्षवर्धन, बब्बन* के रूप में
पाली खेल जगत को पंचरत्न की परख है करवाई ।

*शांतिलाल जी रावल* ने संगीत पौध की दिल से की सिंचाई,
तभी तो आज पाली में संगीत की फसल है लहराई।

*शैलेंद्रसा* की गज़ल गायकी ने दिलों पे की छपाई।

*राहुल बलाड* की भक्ति संध्यायें भी सबको बड़ी लुभायीं।

जिनपर कृष्ण की कृपा है बनी, *वाह वाह क्या बात* फेम देवांग सोनी,
जानें अनेकों साज़, मनमोहे उनकी *बांसुरी* हैं मधुर कंठ के धनी।

*हितेश सांखला* ने सितार के तार छेड़ पाली की शान बढ़ाई।

नाम से ना आंको कद को,
‘पाली’ के हुनर ने ये बात आज सिद्ध कर दिखाई।

नमन करूं मीरा जी और राणा प्रताप की भूमि को, ये ऐसे ही नाम कमाये,
नमन करूं उन मात-पिता को जिनसे संस्कार ये आये।।

किरण भारद्वाज
जन्मस्थान अलवर

Loading...
SHARE
Previous articleधूप की प्रतीक्षा!!
Next articleकश्मीर में “हस्ताक्षर बदलो अभियान “की शुरुआत: हिन्दी प्रेमी हुए एकजुट
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here