दर्द को अपना बना लो साज़ फिर!!

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— ग़ज़ल —

बैठकर सागर किनारे आज फिर।
सुन रहा लहरों की मैं आवाज़ फिर।

शांत सागर-सा अगर रहना हो तो,
सीख लो तुम शांति का ये राज़ फिर।

शाम-सी बोझिल अगर हो ज़िंदगी,
सुब्ह होगा सूर्य का आगाज़ फिर।

ज़ख़्म उलफ़त में मिला है जो यहाँ,
दर्द को अपना बना लो साज़ फिर।

प्यार सिखलाता हमें जीना यहाँ,
इसलिए कर प्यार का तू काज फिर।

विनोद सागर

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