फ़ासला (लघुकथा)

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फ़ासला (लघुकथा)

कपास के फाहे से बीज निकाल कर शाम के समय दीपक लगाने के लिए बत्तीयाँ बनाते बनाते मिनकी की दादी ने आवाज लगाई,

मिनकी…जरा पानी तो पिला दो !

इस पर किताबों के बीच सर रख कर बैठी मिनकी दादी से बोली,

Yes Grand ma, i am coming,

और दौड़ कर मिनकी पानी ले आई और दादी को मिनकी ने पानी दिया|

दादी ने पानी लाने के एवज में मिनकी से कुछ नहीं कहा, तभी मिनकी तपाक से बोल गई,

Grand Ma! You don’t said Thanks??

अंग्रेजी न जानने वाली दादी निशब्द,निरुत्तरित रह गई…|

क्या अंग्रेजीयत में डूबी हुई पीढ़ी के मातृभाषा से दूर हो जाने भर से घर के बुजुर्गों और बच्चों में *फासलें* आ गए? आखिर संस्कार और संबंधो की खाईयाँ *मातृभाषा* ही पाट सकती है, क्योंकि भावनाओं की सच्ची संवाहक माँ की भाषा ही हो सकती है।

*डॉ.अर्पण जैन ‘अविचल’*

पत्रकार एवं स्तंभकार,

इंदौर, मध्यप्रदेश

9406653005

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