है याद बहुत! (बालदिवस 14 नवंबर)

0
30

है याद बहुत
………….
हम कुछ भूले,
है याद बहुत।….

बचपन के वह खेल-खिलौने,
घर-आंगन के कोने-कोने,
भाई-बहन और सखियों के संग,
लुका-छिपी के खेल सलोने।

जोर-जोर से हँसी-ठिठोली,
है याद वो मीठी बात बहुत।
हम कुछ भूले,
है याद बहुत….

विद्यालय मे ज्यादा मस्ती,
पढने की कोई फिक्र न होती,
हँसते जाना, खेल के आना,
चिंता की कोई बात न जँचती।

छल-कपट और मतलब की दुनिया
से हम थे आजाद बहुत।
हम कुछ भूले,
है याद बहुत…..

जाड़े की वह धूप सुहानी,
बैठके करते थे मनमानी,
रजाई के अंदर किस्सा कहानी,
जिसमे था राजा और रानी।

लड्डू,तिलवा मे होता था,
माँ के हाथों की मिठास बहुत।
हम कुछ भूले,
है याद बहुत….

बागों में आमों की डाली,
ऊपर बैठी कोयल काली,
कू-कू करके रस बरसाती,
क्यूँ इतनी लगती थी निराली।

उसके स्वर मे हम भी गाकर,
करते थे संवाद बहुत।
हम कुछ भूले,
है याद बहुत….

गर्मी की दुपहर मे सबसे
छिपकर बागों में घुस जाना,
जामुन-आम को तोड़-तोड़कर,
वहीं बैठकर खाते जाना।

अल्हड़, चंचल, निर्मल, कोमल,
थे अपने जज्बात बहुत।
हम कुछ भूले
है याद बहुत..

सावन की रिमझिम फुहार में,
दौड़-दौड़कर बदन भिंगाना,
पानी की पतली धारा में,
वह कागज की नाव बहाना।

समय-धार में जीवन बह गया,
कुछ करने की रह गई चाह बहुत।
हम कुछ भूले,
है याद बहुत….

जीवन एक कहानी जैसा,
समय है बहता पानी जैसा,
सुख-दुख सब बहता जाता है,
रह जाता है निशानी जैसा।

चलने की दो शक्ति”जुही”को,
प्रभु तुमसे है फरियाद बहुत।
हम कुछ भूले,
है याद बहुत….


………..
बालदिवस की बधाई!!!!
एस. के. जूही, विशाखापटनम्

Loading...
SHARE
Previous articleबच्चों की सोच (लघु बाल कथा) बालदिवस 14 नवंबर
Next articleअरमान !
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here