मुट्ठी भर कलरव ( नवगीत )बालदिवस विशेष

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मुट्ठी भर कलरव ( नवगीत )

मुट्ठी भर
कलरव समेट कर
मॊन हो गया
चिड़ियाघर **

चित्रों सी
शान्त भूमिकाएं
भीतर
वेताल की कथाएं
कटी हुई जीभें
लाचार
कितना भी
पंख फड़फड़ाएं *
चुटकी भर
दर्द फेंट कर
मॊन हो गया
चिड़ियाघर **

दृश्य हर तरफ
फफूंदिये
क्या जिया शहर
न पूछिये
तार घिरे
बाड़ों के बीच
कॆसे भी
श्वास तोलिये *
पुटकी भर
प्रश्न टेंट कर
मॊन हो गया
चिड़ियाघर **
************


चन्द्रप्रकाश पाण्डे / लालगंज

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