प्रणय निवेदन!

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     प्रणय निवेदन

मेरे जीवन के उजाड़ पल की
तुम बौछार बनी।
प्रथम प्रणय निवेदन की
तुम प्रज्वलित ज्वाला बनी।।
हृदय कम्पित था मन अधीर,
जीवन ज्योति बन उपहार बनीं।
मोहित मन ने तन का साथ दिया,
जीवन रस को पी लेने का उल्लास मिला।।
रात बीतती जाती थी तब उस पल,
उमंग तरंग से मन आह्लादित था ।।

गगन चल रहा था अपनी चाल,
तारे टिमटिमा कुछ कह जाते थे।
पल में शीतल पवन का झोंका,
तुममें कुछ कम्पन दे जाता था।
निखर उठता तुम्हारा तन मन,
मगन हो लिपट जाना बेल सा ।
काया की रंगत बदलती पल -पल,
भोर की पहली किरण छू निकली।
मेरी राधा मुझमें खोई थी तब,
सुध-बुध खोकर उसने ली अंगड़ाई।
तब जाना प्रणय निवेदन स्वीकार हुआ।।

सुधीर सिंह सुधाकर
मगसम-दिल्ली
11/11/2017

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