मुस्कुराये हुये जमाना हो गया!

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मुस्कुराये हुये जमाना हो गया!

मुस्कुराये हुये जमाना हो गया ।
खामोशी से ये दिल लगाना हो गया ।।

बात अब भी दबा रखी है दिल में वो ।
रुठना आपका बहाना हो गया ।।

तेरी फितरत तो है बेवफाई सनम ।
हर पलों मैं तुम्हें रूलाना हो गया ।।

चाहते है ये हम यकीं हो तुम पे फिर ।
सपनों में तुम्हारा ही आना हो गया ।।

‘रुबी’ करना न फिर यकीं दिल का कभी ।
चाँद खामोशी का दिवाना हो गया ।।

रुबी प्रसाद
सिलीगुड़ी

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