आंधियों की धुन पे’ गाती ज़िंदगी !!

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आंधियों की धुन पे’ गाती ज़िंदगी

आंधियों की धुन पे’ गाती ज़िंदगी!
दीप हिम्मत के जलाती  ज़िदगी!!
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वक्त की सरगोशियों के साज़ पर!
दिलनशीं नगमे सुनाती जिंदगी!!
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चूम लेता गर बुलंदी है बशर!
खिलखिलाकर मुस्कुराती ज़िंदगी!!
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गरदिशों के काफ़िले को रौंदकर!
खुशनुमा मंज़र दिखाती ज़िंदगी!!
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आज को जीना मुसाफ़िर शान से!
बस यही पैग़ाम लाती ज़िंदगी!!
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धर्मेन्द्र अरोड़ा “मुसाफ़िर”
(9034376051)

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