मारुति  वंदन ( प्रमोद सनाढ़्य “प्रमोद”)

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मारुति  वंदन

जय मारुति नंदन वंदन है
कपि केसरी नंदन वंदन है।
जय जय भय भंजन हरि हिय रंजन
अंजनी सुत अभिवंदन है।।

है पवन पुत्र बलवंत महाशिव
रूद्र अंश हनुमंत महान।
तेज तपस्वी वीर महाबली
सकल सुमंल सुमति सुजान।।

हरि हितकारी अति बल धारी
मंगल कारी वंदन है।
जय राम रमापति नाथ निकन्दन
संकट हारी अभिवंदन है।।

सँग सिया के जिनके हिरदय
बसते रघुपति राजा राम।
महावीर हनुमान गुंसाई
मै सुमिरूं नित सुबह शाम।।

है देव दयालु दुष्ट विनाशक
दीन हीन प्रिय वंदन है।
करूण कृपालु करूणा सागर
करुण कृपा अभिवंदन है।।

वेदग्रंथ महामंत्र मनस्वी
ज्ञान ध्यान के तुम ज्ञाता।
तुमरि शरण मे जो कोई आता
प्रभु मन सुख सम्पति पाता।।

है बजरंगी कपि अवतारी
प्रिय रघुननदं वंदन है।
तुमरे चरणन शीश नमन कर
कर बंधन कर वंदन है।।

प्रमोद सनाढ़्य “प्रमोद”
राजसमन्द

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