दर्पण/आईना ( हाइकु)by Dr.Purnima Rai

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Dr.Purnima Rai,Asr
1.
दर्पण देखूँ
बाहरी आकर्षण
धूमिल अक्स!!
2.
काँच के जैसे
टूट जाते रिश्ते
हँसे आईना!!
3.
अक्स तुम्हारा
दर्पण के मानिंद
शुभ्र उज्ज्वल !!
4.
दरार आई
अहं भरा मानव
बोले दर्पण!!
5.
मौन आईना
टूट गये सपने
पल छिन्न में!!
6.
श्वेत दर्पण
चमकती धूप में
लहर क्रीड़ा!!
7.
शीशा निहारे
भीतरी मन ढूँढे
बावरा तन!!
8.
तेरा चेहरा
है जीने का सबब
आईना चाहूँ!!
9.
मोम सा दिल
काँच सा है नाजुक
दूर तपिश!!
10.
दर्पण संग
बतियावै रात में
चाँद है दूर!!
– डॉ०पूर्णिमा राय
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