शोर (लघुकथा) by Dr.Purnima Rai

0
90

शोर (लघुकथा)

हैलो मैडम!हाय मैम!नमस्कार दीदी!कैसे हैं आप?दीपावली की शुभकामनाएं!दीवाली की सपरिवार ढेरों बधाइयाँ!यह दीवाली आपकी जिन्दगी में खुशियाँ और बहार लेकर आये।आप तन-मन से स्वस्थ एवं निरोग रहें। लक्ष्मी माँ की आप पर अपार कृपा बनी रहे।कितनी खुश थी चंचला!फेसबुक,वात्सैप,पर आये दीपावली के ढेरों मैसेज एवं टैग की गई दीवाली की बधाई से लबालब पोस्ट पढ़ते-पढ़ते कभी हँस पढ़ती ,कभी रिप्लाई में आपको भी मुबारक लिख देती।इतना प्यार व स्नेह पाकर मंत्रमुग्ध सी हो गई चंचला ! मैं 70%लोगों को जानती हूँ।30% मुझे जानते होंगें,शायद!पर फिर भी कुछ पल प्रतिदिन नेट की दुनिया में बिताना अच्छा लगता है।है न! दिल से निकली आवाज़ को सुनती है। अरे.,यहाँ तो सारा दिन कब निकल जायेगा, पता भी नहीं चलेगा। लैपटाप से नजर हटी तो बिस्तर के पास सटे मेज पर पड़ी तस्वीर पर जा अटकी।ओह ,आप तो हमें यूँही देखते रहियेगा।
एक लंबी साँस भरते हुये चंचला अलमारी खोलती है,लाल जोड़ा झटके से नीचे गिर जाता है। तस्वीर को साड़ी दिखाती है ।आज यह पहनूँगी।बोलो तो ,कैसी लगूँगी।बोलो ना।बच्चों की तरह बार-बार जिद्द करती हुयी तस्वीर से लिपट कर रो पड़ती है ।बोलते क्यों नहीं,”चुप क्यों हो?लोहड़ी पर मायके छोड़ कर गये थे,यह कहकर कि युद्ध समाप्त होते ही दीवाली पर आऊँगा लेने।” देखो ,आज दीवाली है ,हमारी शादी की पाँचवीं सालगिरह भी है ,जल्दी से आ जाओ।मैं अब दीवाली तुम्हारे साथ ही मनाऊँगी। सफेद साड़ी में लिपटी चंचला भारत माँ के वीर सपूत दिनेश के नाम का एक दीया जलाती है।अपने बूढ़े अन्धे पिता की लाठी की आवाज़ सुनकर आँसू पोंछती हुयी कहती है ,पिता जी दीवाली मुबारक हो !आतिशबाजी के शोरगुल में चंचला के मन का शोर मंद हो जाता है।

डॉ.पूर्णिमा राय,
शिक्षिका एवं लेखिका
अमृतसर(पंजाब)
drpurnima01.dpr@gmail.com

 

Loading...
SHARE
Previous articleईश्वर पैदा किए जाते हैं !
Next articleअचिन्त साहित्य “दीपावली क्षणिका विशेषांक”:एक विशाल क्षणिका संग्रह –दीपोत्सव मुबारक हो!
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here