दीपमाला(नीलिमा शर्मा नीविया) कवितायें

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नीलिमा शर्मा नीविया की कवितायें

१)नेग

होंठों से रिसता खून
सूनी आँखे
लहराती सी चाल
बिखरे से बंधे बाल
बनिता आँगन लीप रही है
आज धनतेरस है
किसनू लोहे की
करछी खरीद लाया है
शगुन के लिए
आते ही उसे
घर की लक्ष्मी पर
आजमाया है
बनिता की माँ ने
पहली दीवाली का
शगुन नही भिजवाया है!!
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२)दीपमाला

टिमटिम दीयों की माला से
जो रौशन होती थी
अमावस की रात
घर-बाहर की साफ़ सफाई से
जो पुलकित होती थी
गृहलक्ष्मी की ज़ात
घर-घर आते थे मेहमान
रसोई में महक होती थी
पकवानों के साथ
आज नौकर,झालर और सोनपापड़ी
संग नही होती है
माई की दीवाली जैसी बात !!
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३) आउट डेटेड

कितने उपहार आने हैं
इस बरस
सबको तोहफे में देने के लिए
दो माह पहले ही जो लिस्ट बनाते हैं
दीवाली की रात
माँ-बाबा के कमरे में
दिया तो दूर
लाइट जलाना भी भूल जाते हैं
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४) विसंगति

मधुमेह हैआपको
एक टुकड़ा भी
मिठाई नहींं मिलेगी
दवाई मालूम भी है आपको
कितने की आती है ??
पैसे कमाना कितना मुश्किल है
उस पर महंगाई भी
बच्चोंं की फीस भी है
आपकी बेटी की बेटी की सगाई भी
पुरानी साड़ी मेरी धुलवा दी है
इनकी शर्ट पुरानी भी
कौन है अब आपका
मिलने-जुलने वाला
उफ़ चादर नई बिछानी नहीं है
कहने सुनने वाले
बच्चे अब अमीर हो गये हैं
कुछ सौ रुपये बचाकर
हजारों के पटाखे फूँँकते हैं
लाख रुपये जुए में हार कर
दीवाली मनाते हैं
माँ बाबा उनके
देर रात रसोई से
बासे पकवान
ठण्डे ही खाकर दीवाली मनाते हैं!!
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५) यादें

घर का कबाड़ बेचकर हमने
कुछ कमाई तो कर ली
पुरानी यादें लेकिन
पत्थर के मोल बेच दी
नन्हे के जूते
छोटी के रिबन
दादी की माला
माँ का बाला
सब सपनोंं में याद आते हैं
जब दो लोग
जीवन के अंतिम पहर में
अकेले यादोंं को फरोलते
अकेले दीवाली मनाते हैं!!
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नीलिमा शर्मा निविया
C 2 /133
जनकपुरी नयी दिल्ली

 

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8 COMMENTS

  1. कमाल की कल्पना शक्ति.. शब्दों की जुगलबंदी..
    वाहहहहहह वाहहहहहह, नीलिमा जी
    बहुत ही सुंदर और मधुर रचनायें … बहुत बहुत बधाइयां ।

  2. बहुत सुंदर सृजन!एक विषय से संबंधित विभिन्न भावनाओं की उम्दाभिव्यक्ति!!हृदयस्पर्शी!!

    • आभार आपका ,आपने मेरे शब्दों को यहां स्थान दिया

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