विश्वासघात (देवेंद्र सोनी)

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जरा हटके – लघुकथा  – विश्वासघात

      उच्चकुलीन परिवार की राधा ने अपनी पढ़ाई पूरी करते – सरकारी नोकरी के लिए भी इंटरव्यू दिए थे । एक दिन अचानक ही उसका चयन भी हो गया  और उसे  सरकारी नोकरी मिल गई । अब समस्या यह थी घर से दूर वह अकेली कैसे रहेगी । माँ और पिता दोनों भी सरकारी मुलाजिम थे और घर में उससे छोटा एक भाई भी था । पारिवारिक विचार – विमर्श के बाद अंततः राधा हिम्मत करके पास के ही शहर में रहने लगी । हर सप्ताह वह अपने घर आ जाती और फिर चली जाती। कुछ समय तक यह क्रम अबाध चलता रहा और फिर उसने आना – जाना कम कर दिया । इस बीच राधा एक युवक के मोहपाश में आकर प्रेम करने लगी । परिवार को जब इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने विजातीय विवाह से साफ इंकार कर दिया । कुछ दिन के प्रेमालाप के बाद उस युवक ने भी अपनी मजबूरी बताते हुए राधा से किनारा कर लिया । इस असफल प्रेम ने राधा के मन में एक अजीब सी वितृष्णा भर दी और उसने जीवन भर विवाह न करने की ठान ली । समय बीतता गया और एक – एक करके माता – पिता भी साथ छोड़ गए। अब छोटे भाई की परवरिश की समस्या के कारण राधा ने अपना स्थानांतरण अपने ही शहर में करवा लिया और भाई के साथ ही रहने लगी । समय तेजी से दौड़ता है । भाई की शादी के बाद राधा को एकाकीपन सालने लगा । घर में भी आये दिन के झगड़ों से अब राधा को अपनी गलती का एहसास होता पर समय बीत चुका था। देखते ही देखते राधा की सेवा निवृति भी हो गई। एक मुश्त मिला पैसा देख भाई – भाभी ने प्यार जताना शुरू कर दिया और धीरे – धीरे सब अपने नाम करवा लिया। पेंशन आते ही छुड़ा ली जाती । यही राधा की सबसे बड़ी भूल थी । पैसा हाथ से जाते ही फिर वही झगड़े – झझन्ट शुरू हो गए। अब बात – बात पर उसकी पिटाई भी होने लगी । कई बार जिंदगी से हारकर वह रेल पटरियों तक गई और लौट आई। जिंदगी उसकी बेजान हो चली थी । जब कभी रोती यही सोचती – आखिर उससे विश्वासघात किया किसने – प्रेमी ने या भाई ने ? या उसने ही अपनी हठधर्मिता के कारण खुद से किया है विश्वासघात । पर , कभी न पा सकी अपने जीते जी राधा इन प्रश्नों का उत्तर।


– देवेंन्द्र सोनी , इटारसी।

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