” स्वर्णिम दीपावली”by Dr.Purnima Rai

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” स्वर्णिम दीपावली “

भूलकर राग-द्वेष को
अमन शांति के दीप जलायें ।
सजाकर प्रेम भावना
सुखमय दीपावली मनायें ।।

मोड़ कर मुख आतिशबाजी से
पेड़ पौधों की कतार लगायें ।
दिखाकर सहर्ष भावना
मंगलमय दीपावली मनायें ।।

मिटाकर कलंक भ्रूण हत्या का
लक्षमी मां का वरदान पायें ।
अपनाकर समता भावना
वन्दनमय दीपावली मनायें ।।

बनाकर धरा प्रदूषण रहित
स्वर्णिम फूलों से आंगन सजाये ।
धारण कर दृढ़ भावना
संकल्पमय दीपावली मनायें ।।

त्याग कर सुख स्व हित का
परदुखकातर बन जायें ।
फैलाकर समर्पण भावना
परमार्थमय दीपावली मनायें ।।

पहचान कर ताकत नारी की
शोषण विरूद्ध आवाज़ उठायें।
जुटा कर धैर्य भावना
उत्साहमय दीपावली मनायें ।।

डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर 

drpurnima01.dpr@gmail.com

1.मेरी पुस्तक “ओस की बूँदें “(काव्यसंग्रह 2016)में प्रकाशित कविता 

2.”कवि हम तुम “मोबाइल एप में प्रकाशित 

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2 COMMENTS

  1. स्वर्णिम दीपावली। सार्थक रचना

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