कड़वा सच (लघुकथा)देवेंद्र सोनी

0
151

कड़वा सच (लघुकथा)

रात के दो बजने को आए थे पर सोमू का अभी तक कोई पता नही था । फोन का स्विच भी बंद था। अपने कमरे में अकेली राधा की बैचेनी चरम पर थी । यहां वहां चहल कदमी भी करे तो कब तक ? थक हार कर अंततः वह अपने पलंग पर लेट गई , मगर बढ़ती बैचेनी ने उसे दो पल भी सोने न दिया । मन में बुरे बुरे विचार आने लगे और वह किसी अनिष्ट की आशंका से घबराकर फिर उठ बैठी। उसे समझ नही आ रहा था कि वह अब करे तो क्या करे । नीचे के कमरे में परिवार के अन्य सदस्य भी सो रहे थे पर किसी के पास भी इस नई – नवेली बहू के लिए समय नही था । कुछ सोचकर राधा ने सोमू के एक दोस्त को फोन लगाकर पता किया पर कोई जानकारी नही मिली जिससे वह और ज्यादा आशंकित हो उठी वाबजूद इसके वह नीचे जाने की हिम्मत न जुटा सकी ।
तीन बजे के लगभग सोमू ने घर में प्रवेश किया और आते ही बोला मेरे दोस्त से मेरी जासूसी कर रही थी । इतनी रात तक जाग कर और किस से फोन पर बतिया रही थी । सोई क्यों नही अब तक । यह सुन राधा बिलख पड़ी और बोली -आपको लेट आना था तो आपने मुझे फोन क्यों नही किया। सुबह के जरा से झगड़े की इतनी बड़ी सजा। मुझसे बात नही करना था तो घर में ही किसी को बता देते। मैं आशंकित तो नही रहती पर राधा की सब बातों को नशे की हालत में अनसुना कर सोमू यह कहते हुए तुरन्त ही सो गया कि मैने भैय्या को फोन पर बता दिया था ।राधा के लिए यह सब अप्रत्याशित था । वह सोच रही थी – यदि सोमू ने फोन किया था तो उसे परिवार के किसी भी सदस्य ने बताया क्यों नही। इतनी लापरवाही कोई कैसे कर सकता है । अब रह -रह कर उसे वे सब बातें याद आ रही थी जो बीते दिनों में उसके साथ घटी थी । उसे कई दिनों से लग रहा था कि कहीं न कहीं उन दोनों के रहन – सहन और वैचारिक स्तर में असमानता थी । यही वजह थी दोनों के मन नही मिल पा रहे थे और रोज ही कोई न कोई विवाद हो जाता । पर घर से देर रात तक गायब रहना किसी समस्या का हल तो नही ।
रात ज्यों ज्यों बीतती जा रही थी – राधा को एहसास हो रहा था उस कड़वी सच्चाई का जो शादी से पहले उसके परिजनों ने जताई थी मगर अपनी जिद्द के चलते वह नही मानी और पंडितों की आशंकाओं को भी नजर अंदाज करते हुए उसने शादी की । आज उन सब बातों का प्रतिफल एक कड़वे सच के रूप में उसके सामने था, जिसका सामना और समाधान अब उसे ही करना होगा । उसका निर्णय ही अब उसका भविष्य होगा । यही जीवन का कड़वा सच भी है राधा के लिए।

– देवेंन्द्र सोनी, इटारसी।
प्रधान सम्पादक , युवा प्रवर्तक , इटारसी।
9111460478

Loading...
SHARE
Previous articleकुछ ऐसे आ जाए दीवाली!!
Next articleउम्मीद  (देवेंद्र सोनी)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here