राष्ट्रीय बालिका दिवस 11अक्तूबर “बेटियाँ “पर दो ग़ज़लें by Dr.Purnima Rai

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राष्ट्रीय बालिका दिवस 11अक्तूबर
“बेटियाँ “पर दो ग़ज़लें by Dr.Purnima Rai

राष्ट्रीय बालिका दिवस की हार्दिक बधाई!!

1)

बेटियों का अब जमाना आ गया।
हार में भी मुस्कुराना आ गया।।

रोज परचम जीत का लहरा रहीं
आस उनपर भी लगाना आ गया।।

लाडले बेटे अगर माँ-बाप के
प्यार बिटिया पर लुटाना आ गया।।

फौज़ में भर्ती हुई जब बेटियाँ
गर्व से सीना फुलाना आ गया।।

अब नहीं कमजोर जग में बेटियाँ
राह के कंटक हटाना आ गया।।

वे सदा हक के लिये लड़ती रहीं
फर्ज उनको भी निभाना आ गया।।

दान दें दें जिन्दगी का हम उन्हें
“पूर्णिमा” बन जगमगाना आ गया।।

बह्र–2122 2122 212
काफिया–आना // रदीफ— आ गया
***********************************

2)

प्यार ही बाँटती बेटियाँ
साथ ही चाहती बेटियाँ।।

छाँव बनकर कड़ी धूप में
दुक्ख को टालती बेटियाँ।।

दौर मुश्किल का आये अगर
बाप सँग जागती बेटियाँ।।

जिन्दगी के सफर में सदा
धैर्य को पालती बेटियाँ।।

बोझ लगते न रिश्ते कभी
वक्त ही माँगती बेटियाँ।।

माँ गई ईश के घर में जब
बाल को पालती बेटियाँ।।

नाज़ उन पे रहे बाप को
वीर बन साजती बेटियाँ।।

मात बिन चैन पाये न मन
बाप को ताकती बेटियाँ।।

उम्र आढ़े न आये कभी
खुद का सुख वारती बेटियाँ।।

प्रीत की डोर कच्ची नहीं
“पूर्णिमा” भालती बेटियाँ।

बह्र–212 212 212
काफिया–अती // रदीफ—बेटियाँ

डॉ.पूर्णिमा राय,
शिक्षिका एवं लेखिका
अमृतसर
drpurnima01.dpr@gmail.com

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3 COMMENTS

  1. पूर्णिमा जी बेटियों पर लिखी दोनों कविताएँ प्रशंसनीय हैं।

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