रोशनी के दीप हर घर में जलाइये

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गम के अंधेरे करें दूर सदा मनवा से

रोशनी के दीप हर घर में जलाइये।

टूट के बिखर गये मोतियों के कंठहार

फूल चुन बगिया से माला में सजाइये।।

काली घटा छाये कभी  भाषा जाति झगड़ों की

प्रेम की लकीर खींच बैर को भुलाइये।।

वाणी में मिठास दिखे कोयल सा सुर मिले।

दुखियों के आँसू पोंछ साथ मिल गाइये।।

– डॉ०पूर्णिमा राय
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