हम तुम जुदा हो गये -क्षणिकाएँ (चन्द्रप्रकाश पाण्डे )

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हम तुम जुदा हो गये -क्षणिकाएँ (चन्द्रप्रकाश पाण्डे )
१**
एकदम चुप्पे
दुख जी लेते हॆं
सोख़ते
स्याही पी लेते हैं **

२**
हम – तुम
जुदा हो गये
टूटे पुल के
इधर- उधर
सड़क जॆसे **
—-
३**
घूंट दो घूंट
पी कर भी
हमारी तृष्णा नहीं बुझती है
राम जाने उनकी
ज़िन्दगी जिनकी
ओस चाट के गुजरती है **
—–
४**
दर्शकों की भीड़ में
चारो तरफ से घिरा
बल्लियों उछल कर
हाथों नीचे गिरा
निकल गये प्राण
ज़िन्दगी जिलाने में
लोग कहें
नट करे तमाशा **
—-
५**
परिस्थितियों की अंगूठी में
शोभित रत्न हूं
समय ने पहना है मुझे
बदल- बदल के अंगुलियों में **
—–
६**
मेरे बुरे दिनों में मुझे
टेढ़ी नज़रों से
देखते थे मेरे मित्र लोग
जॆसे ग्रहण के चन्द्रमा को
जल भरी थाली में देखते हैं लोग **
—-
७**
तुम
मुझे भूल गये
पुराने अख़बार की
ख़बर जॆसे *
—–
८**
मैं हूँ कक्षा में ब्लैक बोर्ड जैसे
समय के
अध्यापकों ने
कुछ लिखा
कुछ मिटाया हम पे **


—–
@ चन्द्रप्रकाश पाण्डे / लालगंज
9621166955

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3 COMMENTS

  1. हर क्षणिका में भाव संप्रेषण एवं गहनता…सहजता का निवास …हार्दिक बधाई..आदरणीय

  2. मुँह से बस वाह निकली, बधाई आदरणीय।

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