आज रात चांद तेरा इंतजार है

2
216

    करवे की रात 

आज रात चांद तेरा इंतजार है

 हमें हुआ तुमसे ही प्यार है।

इतना न.सता तू हमें तेरे लिये किया श्रृंगार है

भूखी हूँ प्यासी तुम बिन,तू क्यों शरमाया सा ।

क्षितिज के पार है,आज करवे की रात है।

भारत का सुन्दर सा,रीति रिवाज है

सोलह श्रृंगार कर,सुहागनगरी में ।

खुशी से अभिभूत,हाथ थाल ले ।

छलनी में से झांक, हुई आज निहाल हूँ।

अर्विना गहलोत

शिक्षा एम एस सी वनस्पति विज्ञान

पता D77 विधुत नगर एन टी पी सी दादरी

ashisharpit@gmail.com

विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित

रचना स्वरचित मोलिक है प्रामाणित करती

Loading...
SHARE
Previous articleमुझे अच्छा लगता है!!
Next articleहम तुम जुदा हो गये -क्षणिकाएँ (चन्द्रप्रकाश पाण्डे )
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

2 COMMENTS

  1. बहुत सुन्दर रचना . आपकी इस बेबसाईट को साहित्य को लोगों तक सुलाभ करवाने के लिए हार्दिक बधाई …शुभकामाएं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here