मुझे अच्छा लगता है!!

0
196

*मुझे अच्छा लगता है*

मेरे प्रियतम !
तुम्हारे प्यार से
खुद को सजाना
मुझे अच्छा लगता है,
सुहाग की निशानियों से
अपना प्यार जतलाना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारी समृद्धि के लिए
भवों के बीच
कुमकुम की बिंदी लगाना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारे प्यार को दर्शाती
हाथों में मेहंदी का
गहरा लाल रंग रचाना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारी लंबी उम्र के लिए
और प्रेम की मर्यादा
बनाये रखने के लिए
मांग में सिंदूर सजाना
और मांग टीका लगाना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारी मान मर्यादा
की रक्षा के लिये
नाक में नथ पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारी बुराई
अपने कानों में न पड़ने दूँ
कान की कच्ची न पड़ जाऊँ
इसलिए मुझे अपने कानों पर
कर्णफूल सजाना अच्छा लगता है।

तुम्हें दिए वचनों
का मान रखने के लिये
मंगलसूत्र पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारे धन और स्वास्थ्य
की रक्षा के लिए
बाजूबंद पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारे प्यार और विश्वास
को बढ़ाने के लिए
अंगुली में मुंदरी पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारी परम्परा का
निर्वाह करने के लिए
कांच की चूडियाँ
और कंगन पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हें आकर्षित करने के लिए
कमरबंद पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

अपनी आहट से
तुमको जगाने के लिए
पायल पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

सबकी नज़र बचाकर
बिछुए में लगे शीशे
में तुम्हें देखना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारे प्यार की खुशबू लिए
हरसिंगार के फूलों की
वेणी पहनना
मुझे अच्छा लगता है।

अपने नयनों में बसाई
तुम्हारी मूरत को
बुरी नज़र से बचाने के लिए
काजल लगाना
मुझे अच्छा लगता है।

तुम्हारे घर पर
अपना अधिकार
दिखाने के लिए
पांव से आलते की
छाप लगाना
मुझे अच्छा लगता है।

लाल जोड़ा पहनकर
तुम्हारे प्यार की
चुनरी ओढ़कर
तुम्हारे कऱीब आना
मुझे अच्छा लगता है।

मेरे प्रियतम !
तुम्हारी दुल्हन के ये
सोलह श्रृंगार
सब तुम्हारे लिए हैं,
जानते हो
आईने में खुद की छवि में
तुम्हारी छवि देखकर शरमाना
मुझे अच्छा लगता है।
हाँ, मुझे अच्छा लगता है।

नीरजा मेहता

नीरजा मेहता,गाजियाबाद

Loading...
SHARE
Previous articleकरवा चौथ: मंगल कामना
Next articleआज रात चांद तेरा इंतजार है
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here