क्षणिकाएँ

0
214
1*
बस के सफर का
हुआ कुछ
ऐसा असर
चाह हुई पूरी
मिल गया
हमसफर!!
2*
चाय की तलब
के
तलबगार थे
वे
क्योंकि
फुर्सत के लम्हों में
वहीं
मददगार थे।
3*
लकड़ी की काठी
और
बूढ़े की लाठी
दोनों ही
देती हैं आश्रय!!
फर्क बस इतना
एक
ऊपर बिठाती है
दूसरी
गिरने से बचाती है!!
4*
भरोसा मुझे
गिरने नहीं देंगी
बाँहें पिता की!!
हवा से बातें
करने लगी मुन्नी
खिलखिलाती!!
5*
सपनों में जान
आत्मविश्वास दिखे
अंतर्मन में !!
मंजिल पास
हो जाती है दूर
टूटे भरोसा!!
   6*
नग चमके
ककड़ी सी उंगली
खिली किस्मत!!
खोया नगीना
अंध भ्रमजाल से
चिन्तित मन!!
 7*
मकड़ी आस
दिखाती आत्मबल
श्रम में चूर!!
नशे में धुत
युवा लड़खड़ाते
आलस्य में!!
   8*
उदीप्त भाग्य
सिरमौर बना वे
जीते मन को!!
चिन्ता की चक्की
भँवर समुंद्र का
पिसे भरोसा !!
9*
घमंड हो गया
 चूर
जब माँ हो गई
दूर!!
10*
पत्तों की ये
सरसर
अकेले में करते
बड़बड़!!
11*
वोट मशीन
बटन दबाते ही
निकाले नोट!
झूठी आस में
बेचैन जनता ने
तोड़ी मशीन!!
12*
वक्त और उम्र ने
पहले ही
कर दिया
बचपन को प्रौढ़
किताबों के बोझ ने
रीढ़ की हड्डी को
दिया तोड़!!
13*
कोरी स्लेट पर
 लिख डाला
धन के चाक से
ऊँची दुकान
फीका पकवान
टूटा-फूटा ग्रहण
किया
मात्र थोथा ज्ञान!!
14*
बदल जाता है
वक्त के साथ-साथ
 चेहरा -ए-इन्सान
क्योंकि वह है
पंच तत्व निर्मित सुकुमार ।
बस एक नहीं बदलता
वह है
मानव-ए-स्वभाव
चाहे सैंकड़ो बदल ले
वस्त्र परिधान बेशुमार ।।
15*
मतदान
है रक्तदान
एक बचाए जान
दूसरा बचाए
देश की शान!!
16*
दूसरों की
मति से
मत करें मतदान
नोट की चोट
से बदल
जाते हैं वोट!!
– डॉ०पूर्णिमा राय
Loading...
SHARE
Previous articleक्षणिका क्या है?
Next articleघनाक्षरी :बेटी को बचायें by Dr Purnima Rai
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here