क्षणिकाएँ by डॉ.शंकर लाल शर्मा

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क्षणिकाएँ by डॉ.शंकर लाल शर्मा
1)
दल बदल
मोम की तरह
पिघल रह हैं
पिघल पिघलकर
कुर्सी की शक़्ल में
ढल रहे हैं

2)
चमचा
जब किसी ने उसे
नेता जी का पालतू कहा
कुत्ते से नहींं गया सहा
गया स्वर्ग सिधार…. अहा!

3)
महिला सशक्तीकरण
नारी अब तक
नर से हारी
अशक्त नहींं अब वह
वह है भारी!!

4)
समीकरण
लम्बाई कम
पैरों तले गड्डी नोटों की
पूरी हुई लम्बाई
बस हो गई सगाई!!

5)
पितृ-दिवस
बेटे ने पितृ-दिवस
कुछ इस तरह मनाया
वृद्धाश्रम जाकर उन्हें
उनका मनचाहा भोजन
श्रद्धापूर्वक खिलाया !!

6)
रक्षाबंधन
राखी बाँधने
बहिन क्या घर आ गयी
लगता है कोई
उघाई की सूचना
पत्नी पा गई

7)
सोनचिरैया
फुदकती
लुक छिपकर चहकतीं
आती थीं तुम गाती नाचतीं
था था थैया
कहाँ गयीं मेरी सोनचिरैया !!

8)
गाँव में थे
घर थे कच्चे मन थे स्वच्छ
और थे साफ रिश्ते
थे सच्चे!!

9)
हरण
सीताओं के
नहींं होते हरणअब
है आम उनका अपहरण!!

10)
धर्म
विजय-धर्म था कभी
अब तो बस धर्म ही
विजय है

11)
अन्याय
रिश्वत नहींं है अन्याय
मेरे भाई
यह तो हमारी अन्य आय है!!

12)
गौरैया
घर, घोंसलाऔर गौरैया
रह जायेंगे
कहानी जानी पहचानी !!

साहित्यकार डॉ.शंकर लाल शर्मा
मो—9412153756

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1 COMMENT

  1. डॉ .शशि जोशी "शशी "सल्ट ,अल्मोडा ,उत्तराखंड

    सुंदर क्षणिकाएं !

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