क्षणिकाएँ (डॉ0 सतीश चंद्र शर्मा “सुधांशु”)

0
116
 क्षणिकाएँ (डॉ0 सतीश चंद्र शर्मा “सुधांशु”)

1-पुलिस

ततैय्या
और कटैया ।
डंक लगे तो
सभी नाचते
ता-ता थैया।
2-गर्मी ,जाड़ा
या बरसात,
कैक्टस निर्विकार
भाव से बढ़ता है ।
क्यों कि-
यह उसकी 
संघर्ष क्षमता है।
3-जिस मंत्रालय पर
मद्य निषेध की
नैति क जिम्मेवारी है।
उसी पर शराव की
खपत बढ़ाने का
दायित्व भारी है।
4-बसन्त के 
स्वागत में
उपवन ने
भाग लिया।
पततों ने
अपना स्थान
स्वेच्छा से
त्याग दिया।
5-संस्कारों ने
रचा इतिहास।
कैक्टस घर में
तुलसी को
बनवास।
6-सूरजमुखी का मुख
रहता है सूरज 
की ओर
यह उसकी आस्था
का विषय है।
नहीं-
यह उसकी 
स्वामिभक्ति का
परिचय है।
7-न्याय का
अद्भूत संयोग।
सत्य की
विजय में
झूठ का सहयोग।
8-कब तलक है
जिंदगी किसको
पता।
जिंदगी भी
कुछ नहीं पाती
बता।
9-आधुनिक द्रोण ने
गुरु दक्षिणा में
अंगूठा मांग कर
कर्तव्य निभाया।
आधुनिक 
एकलव्य ने
अंगूठा दिखाया।
10-अतिक्रमण
का शासन।
जैसे खबरों
पर विज्ञापन।
– डॉ0 सतीश चंद्र शर्मा “सुधांशु”
ब्रह्मपुरी,पिंडारा रोड,बिसौली-243720
बदायूं(उ0प्र0)मोबाइल-8394034005
Loading...
SHARE
Previous articleमिरा दिल ये दी’वाना हो गया है!
Next articleक्षणिकाएँ by डॉ.शंकर लाल शर्मा
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here