क्षणिका क्या है?

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क्षणिका साहित्य की एक विधा है।
“क्षण की अनुभूति को चुटीले शब्दों में पिरोकर परोसना ही क्षणिका होती है। अर्थात् मन में उपजे गहन विचार को थोड़े से शब्दों में इस प्रकार बाँधना कि कलम से निकले हुए शब्द सीधे पाठक के हृदय में उतर जाये।” मगर शब्द धारदार होने चाहिए। तभी क्षणिका सार्थक होगी अन्यथा नहीं।विद्युत की चमक की भाँति इन कविताओं में अर्थ और भाव की अभिव्यंजना पाठक के हृदय को उद्वेलित कर देती है।
 क्षणिका जितनी मर्मस्पर्शी होगी उतनी वह पाठक के मन पर अपना प्रभाव छोड़ेगी। क्षणिका को हम छोटी कविता भी कह सकते हैं। क्षणिकाएँ हास्य, गम्भीर, शान्त और करुण आदि रसों में भी लिखी जा सकती हैं। सबसे पहले रवीन्द्रनाथ ठाकुर जी ने इसका प्रयोग किया था उनकी छोटी छोटी  कविताएं  “क्षणिका “काव्य संग्रह में प्रकाशित हुई थी बाद में ” स्फुलिंग ” शीर्षक से….
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