शब्दों का खेलby Dr Purnima Rai

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Dr.Purnima Rai,Asr

शब्दों का खेल

      (1)

शब्द प्रवाह

बेंधता निर्बाध ही

मन का द्वार

जाग जाती तृष्णाएं

अर्थ की तलाश में!!

     (2)

अर्थ ग्रहण

मिले तृप्ति पल की

शब्दों का खेल

भँवर ज्यों सागर

घूमता त्यों मस्तिष्क !!

    (3)

अर्थ विहीन

मृदु शब्दों का खेल

उलझ गया

सुबह और शाम

दो दिलों का तराना!!

   (4)

शब्द चातुर्य

बिगाड़े औ सँवारे

सदा सीरत

शब्द के खेल  से ही

हो मुट्ठी में दुनिया!!

डॉ०पूर्णिमा राय,

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