दृष्टिकोण:आभा सिंह” वही रावण जलाये,जो स्वयं राम है”-दशहरा विशेषांक 2017

1
131

आभा सिंह
लघुकथा–दृष्टिकोण

शहर के प्रमुख अखबार का सर्वे चल रहा था। रावण मंडियों में घूमते पत्रकार अवलोकन करते, तरह-तरह के सवाल पूछते, फोटो खींचते विषय की जानकारी ले रहे थे । उन्होंने पाया कि पूरे शहर में जगह- जगह रावण मंडी सजी हुई थीं। लेटे- खड़े- पड़े ,रंग-बिरंगे, विशाल ,मध्यम, छोटे , बेबी रावण, खम्भों के सहारे ग्राहक का इंतज़ार करते, सड़क के किनारे लुढ़के । मस्त अंदाज थे इनके। दस सिर तो नहीं थे पर हाथ में तलवार और ढाल थी।
पत्रकारों को खोज रोचक लग रही थी। जब तक वे इन मंडियों में नहीं गये थे तब तक इन बातों का आभास तक न था। शाम ढलने लगी। काम पूरा हो गया था। वे आपस में बतियाने लगे।
‘ यार, शहर में हर साल इतने रावण जलते हैं पर बुराई तो दूर नहीं होती।’
‘ कैसे होगी , राक्षसों की कमी है क्या , बाबा, नीम- हकीम , भोपे …..और भी ढके-छुपे ढेरों हैं…औरत- मर्द सभी …. ।’ दूसरा रोष में था।
‘ ठीक कहते हो , मंडी में बिकते ये रावण दिखाई तो देते हैं पर असली तो सज्जनता के खोल में छुपे पहचाने भी नहीं जाते।’ महिला पत्रकार ने अपना मत पेश किया।
रावण बनाने वाला कारीगर बड़े ध्यान से सारी बातें सुन रहा था पर क्या समझ रहा था यह तो वही जाने। एक पत्रकार जो उसका इंटरव्यू ले चुका था, बोला ‘ क्यों भैया, अब तुम इस पर क्या कहोगे ?’
कारीगर मुस्कराने की कोशिश करता बोला ‘ अब हम का बोलें सरकार ,जादा तो जानत नाहीं पर ई रावण हमार भगवान है, हमार रोज़ी- रोटी । ई जलिहै तबहूं हमका रोटी मिलिहै । ‘

आभा सिंह,जयपुर

Loading...
SHARE
Previous article” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा–विशेषांक 2017)
Next articleकलयुग में ज़िंदा रावण का वज़ूद:विनोद सागर”वही रावण जलाये,जो स्वयं राम है”दशहरा- विशेषांक2017
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here