मुक्तक by Dr.Purnima Rai

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दिलों में प्रणय की कहानी न होती।
धरा पर यह जीवन रवानी न होती।।
सुनो गान भँवरे का मधुरिम सुरीला;
बिना जल ये कुदरत सुहानी न होती।।
डॉ.पूर्णिमा राय,अमृतसर।
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