विश्व जल दिवस विशेष

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पानी जैसे खून बहे,खून भी सफेद आज;
पानी-पानी लोग हुए,प्यासा माँगे पानी है।।
 
प्योरी फाई घर लगा,व्यर्थ पानी फैंक रहा;
पानी पीने को न मिले, पानी से जवानी है।।
 
गरीब औ’ गाय भैंस,  छप्परों से पानी पीते;
गरीबों जैसा जग में , नहीं कोई सानी है।।
 
बूँद-बूँद पानी बचे ,फिर कहीं घड़ा भरे;
पानी बँद बोतलों से, मिले न रवानी है।।
 
– डॉ.पूर्णिमा राय, अमृतसर
 
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