रावण जन्मा धरती पे : रूबी प्रसाद ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

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रावण जन्मा धरती पे : रूबी प्रसाद

वही रावण जलाये जो स्वयं राम हैं ।
कर्म व आज्ञापालन जिसकी पहचान है ।।
हर किसी के अंदर बस रहा है एक रावण ।
कलयुग या सत्युग दुष्टता का कब विराम है ।।

पराई नार सीता थी उठा ले आया लंका में ।
है पुरुष कर लेगा हासिल डूबा इस शंका में ।।
पराई नार पर कुदृष्टि गृहलक्ष्मी का अपमान ।
कर्मों का फल,हुआ विनाश,विद्वता की डंका में ।। ….

ईर्ष्या, द्वेष व कलह फैल रहा हे माँ धरती पे ।
देख बेटी बहुएं जल रही दहेज की अर्थी पे ।।
अब तो आँखें खोलो कब तक सोयी रहेगी तू ।
राम मर रहा सबके अन्दर रावण जन्मा धरती पे ।।….
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रूबी प्रसाद
सिलीगुड़ी

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