रावण- दहन का हक: डॉ चन्द्रा सायता इंदौर ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

0
124

रावण- दहन का हक: डॉ चन्द्रा सायता इंदौर

राम रावण हैं
सम प्रथमाक्षर नाम
कृष्ण कंस भी
भिन्न वृत्ति और काम ‌।

समाज एक रहा
राम-कर्म मर्यादित
लंकाधिपति थे
विद्वान, पर विवादित।

दिव्यगुणी राम
पुरुषोत्तम जग कहाए
विकारी रावण
राक्षस- कुल में जाये।

लंका विजय कर
सिया को संग लाये
अयोध्या संवरी
राज्याभिषेक दिन आए।

लंकेश देहांत
दशमी दशहरा मने
विजया दशमी ही
जन मध्य रावण जले।

प्रश्न क्यों मौन
आज हमारे मन में?
क्यों कम आंकते
खुद को रावणपन में?

रावण- दहन हक
किसको? ना रहे भ्रम
जो सदगुणी हो
या छोड़ दे स्व- अहम‌।

आज कलयुग है
हर इंसा राम – रावण
का सम्मिश्रण है
बन सकता है पावन।

दशहरा तो है
आत्म- मंथन का दिन
रामत्व जगाएं
जले रावण प्रतिदिन।

 

डॉ चन्द्रा सायता इंदौर

Loading...
SHARE
Previous articleकोई राम नहीं है:संगीता पाठक ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)
Next articleविजयदशमी आई है: वीपी ठाकुर ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)
अचिन्त साहित्य (बेहतर से बेहतरीन की ओर बढ़ते कदम) यह वेबसाईट हिन्दी साहित्य--गद्य एवं पद्य ,छंदबद्ध एवं छंदमुक्त ,सभी प्रकार की साहित्यिक रचनाओं का रसास्वादन करवाने के साथ-साथ,प्रत्येक वर्ग --(बाल ,युवा एवं वृद्ध ) के पाठकों के हिन्दी ज्ञान को समृद्ध करने एवं उनकी साहित्यिक जिज्ञासा का शमन करने हेतु प्रयासरत है। हिन्दी भाषा,साहित्य एवं संस्कृति के विपुल एवं अक्षुण्ण भंडार में अपना साहित्यिक योगदान डालने,समाज एवं साहित्य के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह करने हेतु यह वेबसाईट प्रतिबद्ध है। साहित्य,समाज और शिक्षा पर केन्द्रित इस वेबसाईट का लक्ष्य निस्वार्थ हिन्दी साहित्य सेवा है। डॉ.पूर्णिमा राय, शिक्षिका एवं लेखिका, अमृतसर(पंजाब)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here