कोई राम नहीं है:संगीता पाठक ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

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कोई राम नहीं है:संगीता पाठक

मानव की क्या सही पहचान है।
कौन सही कौन बना भगवान है।।

परनिदां,किसी को बुरा कहना मानव का एक सहज गुण है।वह यह भूल जाता है कि उससे अधिक अवगुण वह स्वंय में रखता है।लेकिन फिर भी…
रावण,रामचरित्र मानस का एक पात्र प्रकांड़ पंडित सैकडों हजा़रों कोटि कोटि गुणों की खान थी।अगर भविष्य वाणी न होती तो वह धनुष टोड़ने की सामर्थ्य भी रखता था।सीता को प्राप्त करना उसकी इच्छा, जुनून जो बाद में एब बन गया।हजार गुणों के बाद भी एक अवगुण ने रावण नाम को एक बुराई का प्रतीक बना दिया।तो आज कौन मन मानव ऐसा है जो बुराइयों से दूर है।
दैहिक भौतिक मानसिक अवगुणों की खान है मानव।रावण एक सफल भाई था।सीताहरण के बाद भी तिनके की ओट में वार्तालाप उसके चरित्र को जहाँ बिठाते है।वह अवर्णिय है।केवल एक बुराई(अहंकार)
उसके विनाश का कारण बनी।जो काम,क्रोध,मोह,लोभ,से जकडा़ था।आज कोई मानव इन दोषों से दूर नहीं है।कोई राम नहीं है।
अगर जला सको तो इन्हें जलाओं।


संगीता पाठक,सहारनपुर

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