हे रावण तुम बुरे थे : अँजना बाजपेई ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

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हे रावण तुम बुरे थे : अँजना बाजपेई

हे रावण तुम बुरे थे
बहुत बुरे थे
फिर भी आज के रावणों से कुछ कम थे…..
महापराक्रमी ,महावीर
तुम्हें जलाते हर वर्ष हम
हे दशानन आप
प्रकांड पंडित ,परम शिवभक्त
शिव तांडव स्रोत के सृजन हार वेदो के ज्ञाता ,
सब कुछ थे आप ,,
हे शूर्पनखा के भ्राता
आपने बहन के अपमान का बदला लिया
मर्यादा पुरषोत्तम
राम की पत्नी का अपहरण किया ….

आपकी गलती छुप ना सकी
आपने जो किया गलत किया ,
गलती की सजा आपको मिली
आप अपने अहंकार में
में डूबे रहे ,मृत्यु का वरण किया…

श्रेष्ठ वीणावादन करते रहे
पर मर्यादा का पालन
न कर सके,,,,
तुमने मिथ्याचरण किया
ऋषि का रूप लेकर
छल किया ,,
सजा मिली जब विभीषण
ने ही भाई होकर
भी राम का साथ दिया ,,,
तुम क्यूँ उदास हो
कर्मानुसार फल ही तो
तुमने प्राप्त किया ,,,
न पूछिये मन में ,
विचारो का मंथन चल रहा है
एक दर्द है जो मन में
पल रहा है …

मर्यादा पुरूषोत्तम राम ने
मेरा वध किया वो इसके
अधिकारी थे ,,,
पर जो मुझे जला रहे है
मुझ से भी बड़े अत्याचारी है ,
परम रावण आज रावण को जला रहे है
और श्री राम जी का उपहास बना रहे है ….
महा अहंकारी है जो यहाँ
सर्वेसर्वा बन बैठे है ,,
रोज विरोधियों पर झूठे सच्चे आरोपों के बाण चलाते है वे अपनी कुंडली
कहो कब बांचते है…

साधु ऋषि का भेष रखे
सब प्रवचन बताते है
यह किस मर्यादा का
पालन करते

अँजना बाजपेई
जगदलपुर (बस्तर )
छत्तीसगढ़

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