शायद रावण नही मरेगा :सुशीला जोशी ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

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शायद रावण नही मरेगा :सुशीला जोशी

त्रेता युग तो बीत गया
रावण अब भी जीवित है
काम क्रोध मद लोभ रूप
हर मन में वह जीवित है ।

कागज बाँस के पुतलों पर
लाखों खर्च किये जाते
लेकिन मन की वृत्ति को
अंकुश लगा नही पाते ।

रावण ने हर ली सीता
पर स्पर्श तक नही किया
ये उसका ही संयम था
लंका में सुरक्षित रही सिया ।

आज तिरस्कृत है हर सीता
सड़कों और चौराहों में
नही सुरक्षित बेटी भी अब
निज बाबुल की बाहों में ।

शायद रावण नही मरेगा
क्योंकि कोई राम नही है
व्यभिचार और बलात्कार सा
अन्य कोई काम नही है ।

रावण को फूकेगा वो ही
जिसमें राम सा कौशल होगा
राजनीति और कूटनीति का
जिसमें अद्भुत संगम होगा ।

सुशीला जोशी
948/ 3, योगेन्द्रपुरी
रामपुरम गेट ,मुजफ्फरनगर 251001

 

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