रावण महाज्ञानी :दीपक कुमार ” वही रावण जलाये जो स्वयं राम है ” (दशहरा –विशेषांक 2017)

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रावण महाज्ञानी :दीपक कुमार

दुष्टता का सूचक ,
खटकता सब की आँख में,
उस की अजब कहानी,
रावण था महाज्ञानी।
पूर्व जन्म में द्वारपाल जय विजय थे
शापित हो विष्णुलोक
से
पा लिए वर अपने स्वामी,
रावण ____।
दस जन्म में भक्त होकर मुक्ति ले लो
या तीन जन्म में शत्रु बन के मुक्त हो लो,
रावण ,कुम्भकरण बन के शत्रुता राम से मानी,
रावण _____।
शिव भक्ति से पा ली सोने की लंका,
काल को बाँध रखा था जिसने,
हुआ न अनजाने में अभिमानी,
रावण ______।
छः शास्त्रों का ज्ञानी ,चारों वेदों का ज्ञाता,
दशाशीश ने राम से लड़ने की ठानी।
रावण____।
ले आया सीता को छल से हाथ पकड़ के,
लंका में लाकर उसने न छू कर ,बना दी नई कहानी ,
रावण___।
चाहता तो मर जाता राम के हाथों वनवास में,
पर कुल को मुक्त करवाने ,
लंका ले आया राम को, जो थे परम ज्ञानी
रावण______।
मरवाया पुत्र को राम के हाथों,
कुम्भकरण को भेजा बाद में,
अंत में खुद पहुँचा शिव ध्यानी,
रावण था______।
मुक्त हो गया राम के हाथों मर कर,
अंत में राम ने लक्ष्मण को सीख दिलवाई सुहानी।
रावण था महाज्ञानी।

दीपक कुमार ,जालन्धर

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